दिव्यता की खोज

अपने अंतर्मन की खोज करनी चाहिए क्योंकि दिव्यता चित्त की गहराइयों में छिपी होती है ~ डॉ गौतम चैटर्जी

Sept 29, 2018

परम करुणामयी माँ, परम पूज्य गुरूजन व आदरणीय डॉ चैटर्जी की चरणधुलि में सर्व समर्पित ।

यह जीवन उस प्यारे की खोज के लिए ही मिला है । जीवन की हर परिस्थिति केवल इसीलिए ही मानो रची गई कि उनसे मेल हो सके । संतगण केवल इसलिए मिले कि परम प्यारे से एक हो जाएं और अपना सर्वस्व उनका हो जाए ! न जाने कब से तरस रहे हैं। किन्तु कुकृत कर डाले और फिर न एक हो सके । पथ पतन न जाने कब से होता आ कहा है और भोग विलास का अंत नहीं ।

किन्तु अब की बार काश किसी की करुणामयी दृष्टि हम ग़रीबों पर पड़ जाए ! हम बेसहारों का और कौन सहारा ! यह जीवन परम प्यारे के बिना तो व्यर्थ । कहां कुछ भाता है उनके सिवाय ! किसी संत आत्मा की दृष्टि ही कृपा बरसा सकती है । इस जीवन को तो केवल परम प्यारे का ही इंतजार है ! वे देवाधिदेव कृपा करें । मेल सुयोग स्वयं बनाएँ । कहीं यह जीवन भी बाकि जन्मोँ की तरह व्यर्थ न चला जाए ! भोगों के पीछे भागते !

सो हाथ जोड़ सजल नयन से विनती करें कि भगवन इस बार अपने बारे में बताया है तो आगे भी अपने तक ले जाने की कृपा करें ! भोग लालसाओं से निस्तारा करें व अपने पथ पर स्वयं ही लेकर जाएं भगवन! एक भी भोग लालसा की बूँद तक न रहे प्रभु ! यह कृपा तो केवल आप कर सकते हैं ! यह अपने बस की बात नहीं ! कृपा करें प्रभु ! दया करें ।

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